बिना कफ़न के
सड़क के किनारे पड़ी
लाश- मेरी है

चारो ओर बैठ कर
रोते बच्चे भी मेरे हैं
लोग मर कर रोते हैं
मुझे देखो
खुश हूँ मैं
बहुत खुश
इतनी जितना , जीते जी
कभी रही नही
न कभी भोजन मिला
न आवास
तन ढकने को कपडे

बमुश्किल मय्यसर होते थे
कभी पेट भर खिला न सकी
बच्चे मेरे दाने- दाने को
रहे तरसते
मैं तन बेचकर भी
बुझा न सकी पेट की ज्वाला
आज मुक्त हूँ मैं
पापी पेट से
बच्चों के बोझ से
किसी की फिकर नही
खुश हूँ मैं
बहुत खुश
29 टिप्पणियां:
bahut khub likha aapne
jindgi ka yehi dastur-e-andaaj hai niraala jinda ko kuch nahi marte ko log salaam karte hai koi marke to koi jeekar sukhi hai kyunki chand haatho mein simat ke rah gayi hai ye jindgi ki lakire saari
Yahi to Haqiqat aur vidambana hai. Bahut Marmik hai
संवेदनापूर्ण कविता..
आपको बधाई,
इस रचना के लिये...
pyar khatam ho jaata to ye duniya bhi khatam ho jaati par is par yakin karne walo ka bharosha jarur dagmaga gaya hai or pehle har koi isk liye barsho haye bharta tha aaj waqt badalte hi mehbub badal jaata hai
mein bhi sacche pyar mein believe karta hu ek hamsafar ek jindgi par jo dekha wo likha agar bura laga ho to maafhi chahta hu
कविता में गहरी संवेदना है। सचमुच इन बदनसीब लोगों के लिए मौत जीवन से बेहतर है। शायद इसीलिए कभी-कभी ये लोग खुद ही मौत का वरण कर लेते हैं।
their is the cordination in thoughts and painting
beautiful expression
regards
their is the cordination in thoughts and painting
beautiful expression
regards
मौत के बहाने जिंदगी की मुश्किलों से रूबरू कराती कविता, फिर भी जिंदगी से भागना नहीं चाहिए, चाहे यह दुखभरी ही क्यों न हो।
VERY NICE KAVITA. APKA BHAVISYA UJJWAL HAI LIKHTE RAHE. ITNI GAMBHIRTA KAM LOGO ME HI DIKHTI HAI
सम्वेदना से भरी आपकी रचना अच्छी लगी। बधाई। किसी की दो पंक्तियाँ-
एक खता और करूँगा मर जाने के बाद।
कंधे पर मैं रहूँगा पैदल चलेंगे आप।।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com
Bahut Achchhi rachna hai, Bhavpurnaa
Bahut Badhai
आप की सियाही का दर्द ...गहराई तक जाता है ..
aapki kavita se pata chalta hai ki aap kitni samvedansheel hai, aksar ham log sadak kinare k aise manjar dekhkar unse katrakar nikal jate hai,agar hum log bhi aap jaise samvedansheel ho jaye to shayad sadak kinare koi lash najar nahi aayegi.
bahut hi achchhi rachana.
दिल की गहराईयों में उतर जाती हैं, आपकी रचनाएं..........
visal ji
aapki baat sahi hai. manushy jiwan me samwedna ka bahut mahtw hai.
Bahut khub.
हमारे समाज का एक सच ये भी है!मार्मिक चित्रण !!आभार
ek nari man ka darpan hai. aur gahrai men utaren to aur moti niklenge.
आज मुक्त हूँ मैं
गंदे शरीर से
पापी पेट से
बच्चों के बोझ से
किसी की फिकर नही
खुश हूँ मैं
बहुत खुश
बहुत सुंदर पंक्तियाँ
आपको मेरे चिट्ठे पर पधारने के लिए बहुत धन्यबाद अपना आगमन नियमित बनाए रखे
सही है-बेहतरीन लिखा!!
"... आज मुक्त हूँ मैं /गंदे शरीर से /पापी पेट से /बच्चों के बोझ से /
किसी की फिकर नही..... " आपके शब्दों और आपकी तारीफ के लिये शब्द नहीं हैं, शुभकामनाएँ, ढेर सारी शुभकामनाएँ।
nice and meaningfull poem hai.
वाह! कितनी खूबसूरत अभिब्यक्ति।दर्द भी इतना की दिल हाय कर उठा।
iss rachna ko bayaan karne kel iey hamare pass koi alfaaz nahi.. dil ki gaherai se kitna sacchal ikha hai apane....
बहुत मार्मिक चित्रण किया है शैली जी आपने..निर्धनता के अभिशाप से त्रस्त .,अभावग्रस्त महिला ...की आत्मा के ये बयां ....
आज मुक्त हूँ मैं
गंदे शरीर से पेट से
बच्चों के बोझ से
किसी की फिकर नही
खुश हूँ मैं
बहुत खुश .....
*******जब जिंदगी मौत से बदतर हों तो फिर मौत को मोक्ष ही मानना पड़ेगा
aap ke bhav jandar shandar hain magar jeena iska nam nahin. ye jindgi itni khubsurat hai ki kya kahane.
करीब १५ दिन होने को आए =इसके बाद कोई रचना नहीं लिखी क्या
bahut hi marmik likha hai. photo aur kavita ka satik sankalan hai.
samaj ko kaphi achha aaina dikhya.
aaj pehli bar apka blog dekha kaphi achha hai. badhai
Very nicely presented. Your blog is really wonderful. You have poured your feelings in these pages. Poems are really good. Keep it up.
Best wishes
Ganesh
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